🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺
🙏 22.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺
सोमस्य धारा पवते नृचक्षस ऋतेन देवान्हवते दिवस्परि।
बृहस्पते रवथेना वि दिद्युते समुद्रासो न सवनानि विव्यचुः॥ ऋग्वेद ९-८०-१॥🙏🌺
ज्ञान और आनंद का दिव्य सोम हमें पवित्र करें और हमें ज्ञान प्रदान करें, जिससे कि हम मानवता के कल्याण के कार्य कर सकें। दिव्य सोम हमारे अंदर दिव्य गुण स्थापित करें। हम दीर्घ जीवन बिताने वाले बनें।🙏🌺
May the divine Soma of knowledge and bliss purify us and give us knowledge so that we can work for the welfare of humanity. May Divya Soma establish divine qualities in us. May we live a long life. (Rig Ved 9-80-1)
🙏🌺#vedgsawana🙏🌺
🌺🌺दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं 🌺🌺

