🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹
🙏 21.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹
अचोदसो नो धन्वन्त्विन्दवः प्र सुवानासो बृहद्दिवेषु हरयः।
वि च नशन्न इषो अरातयोऽर्यो नशन्त सनिषन्त नो धियः॥ ऋग्वेद ९-७९-१॥🙏🌹
अंधकार व दुख को हरने वाला और आनंदपूर्ण प्रभु का रस हम जिज्ञासुओं को मुक्ति के पथ पर ले जाए। जो हमारे समाज की उन्नति के लिए किए जाने वाले हमारे यज्ञों में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसे शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ, आदि) को नष्ट कर दें।🙏🌹
May the pure and divine blissful juice of God lead us to salvation. Let our enemies (lust, anger, greed, etc.) be destroyed, which are posing a hindrance to our Yajana meant for the welfare of others.(Rig Ved 9-79-1)
🙏🌹#vedgsawana🙏🌹

