🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹
🙏 14.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹
शिशुर्न जातोऽव चक्रदद्वने स्वर्यद्वाज्यरुषः सिषासति।
दिवो रेतसा सचते पयोवृधा तमीमहे सुमती शर्म सप्रथः॥ ऋग्वेद ९-७४-१॥🙏🌹
जब अस्तित्व की इस वन भूमि में एक शिशु जन्म लेता है तो वह अपने पोषण के लिए क्रंदन करता है तो सुख स्वरूप, बल स्वरूप और प्रकाश स्वरूप परमात्मा अपने स्नेह को बालक के ऊपर उड़ेलते हैं, और उसे पोषण के लिए दूध प्राप्त कराते हैं। यदि हम भी उस परमात्मा के सम्मुख विलाप करें तो हमारा कल्याण वह कर देगा।🙏🌹
When a child is born in this forest of existence, he cries for his nourishment, and then God, who is the provider of happiness, strength, and light, pours his love on the child and provides him with milk for nourishment. If we also cry in front of God, then He will provide for our welfare.
(Rig Veda 9-74-1)
🙏🌹 #vedgsawana🙏🌹
🙏🌹 मकर संक्रांति की बहुत-बहुत बधाई 🙏🌹

