🌸🌸 ।।ओ३म्।। 🌸🌸
🙏 09.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌸
श्येनो न योनिं सदनं धिया कृतं हिरण्ययमासदं देव एषति।
ए रिणन्ति बर्हिषि प्रियं गिराश्वो न देवाँ अप्येति यज्ञियः॥ ऋग्वेद ९-७१-६॥🙏🌸
जिस प्रकार एक बाज अपने घोंसले में आराम से रहता है उसी प्रकार परमेश्वर का दिव्य प्रकाश हमारे अंदर सुनहरी हृदय गुहा में स्थित होता है। जब दिव्य गुणयुक्त विद्वान परमात्मा की स्तुति करते हैं तो उन्हें उसका साक्षात्कार होता है।🙏🌸
Just as an eagle rests comfortably in its nest, God’s divine light resides within us in the golden heart cavity. When scholars with divine qualities praise God, they experience Him. (Rig Veda 9-71-6)
🙏🌸#vedgsawana 🙏🌸

