🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹
🙏 07.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹
प्र कृष्टिहेव शूष एति रोरुवदसुर्यं वर्णं नि रिणीते अस्य तम्।
जहाति वव्रिं पितुरेति निष्कृतमुपप्रुतं कृणुते निर्णिजं तना॥ ऋग्वेद ९-७१-२॥🙏🌹
इस जगत की उत्पत्ति परमात्मा ने की है। वह सर्वत्र विद्यमान है। जो असुर हैं उन्हें वह दंड देता है। जो मनुष्य दिव्य ज्ञान का पात्र है परमात्मा उसको पूर्ण ज्ञान का प्रकाश देता है, उसे जरवस्था से मुक्त करके अमृता प्रदान करता है।🙏🌹
This world has been created by God. He is present everywhere. He punishes those who are demons. For a person who is worthy of divine knowledge, God gives him the light of true knowledge, frees him from ageing and provides him with Amrita.
(Rig Veda 9-71-2)
🌹🙏#vedgsawana 🌹🙏

