🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻
🙏 12.04.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻
तनूत्यजेव तस्करा वनर्गू रशनाभिर्दशभिरभ्यधीताम्।
इयं ते अग्ने नव्यसी मनीषा युक्ष्वा रथं न शुचयद्भिरङ्गैः॥ ऋग्वेद १०-४-६॥🙏🌻
जिस प्रकार दो चोर अपने दोनों हाथों की दस उंगलियों को प्रयुक्त करके किसी को रस्सियों से बांध देते हैं उसी प्रकार जन्म और मरण ने हमें दस इंद्रियों के विषयों की रस्सियों से बांध रखा है।
हे प्रभु ! हमें ज्ञान का प्रकाश दे कर इन बंधनों से मुक्त कर।🙏🌻
Just as two thieves tie someone with ropes using the ten fingers of both their hands, similarly, birth and death have tied us with the ropes of the lust of the ten Indriyan.
O Lord ! Free us from these bonds by giving us the light of knowledge.
(Rig Ved 10-4-6)
🙏🌻#vedgsawana🙏🌻

