💐💐 ।।ओ३म्।। 💐💐
🙏 30.03.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏💐
अया रुचा हरिण्या पुनानो विश्वा द्वेषांसि तरति स्वयुग्वभिः सूरो न स्वयुग्वभिः।
धारा सुतस्य रोचते पुनानो अरुषो हरिः।
विश्वा यद्रूपा परियात्यृक्वभिः सप्तास्येभिर्ऋक्वभिः॥ ऋग्वेद ९-१११-१॥🙏💐
सोम अपनी अज्ञानता के अंधकार को दूर करने वाली शक्तियों से हमें पवित्र करता है। यह द्वेष और शत्रुता की भावना को हमसे दूर करता है। जिस प्रकार सूर्य अपनी सात रंग की किरणों से अंधकार को दूर करता है। सोम उसी प्रकार सात प्राणिक ऊर्जाओं को पवित्र करता है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर देती हैं।🙏💐
Som purifies us with its powers to dispel the darkness of ignorance. It removes the feeling of hatred and enmity from us. Just as the sun dispels darkness with its seven coloured rays, Som purifies the seven vital energies that dispel the darkness of ignorance.
(Rig Ved 9-111-1)
🙏💐#vedgsawana🙏💐

