🌻🌻 ।।ओ३म्।।🌻🌻
🙏 19.01.24 वेद वाणी 🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻
एष प्र कोशे मधुमाँ अचिक्रददिन्द्रस्य वज्रो वपुषो वपुष्टरः।
अभीमृतस्य सुदुघा घृतश्चुतो वाश्रा अर्षन्ति पयसेव धेनवः॥ ऋग्वेद ९-७७-१॥🙏🌻
सोम जो दिव्य आनंददायक भावना है वह आनंदमय कोष में प्रभु का आव्हान करती है। यह सोम जितेंद्रियं मनुष्य का शत्रुसंहारक अस्त्र भी बनता है। सोम हमारे अंदर सद्गुणों को रोपित करता है। गायों से जिस प्रकार हमें दूध प्राप्त होता है वैसे ही वेद वाणियों से हमें ज्ञानदुग्ध की प्राप्ति होती है।🙏🌻
Soma, which is the divine blissful feeling, invokes the Lord in the blissful sheath. This Soma also becomes a weapon to destroy the enemies of Jitendriya. Soma instills virtues in us. Just as we get milk from cows, similarly, we get the milk of knowledge from the Vedas.(Rig Ved 9-77-1)
🙏🌻 #vedgsawana🙏🌻

