वेद वाणी 31.03.24

🌹🌹 ।।ओ३म्।। 🌹🌹 🙏 31.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌹 नानानं वा उ नो धियो वि व्रतानि जनानाम्। तक्षा रिष्टं रुतं भिषग्ब्रह्मा सुन्वन्तमिच्छतीन्द्रायेन्दो परि स्रव॥ ऋग्वेद ९-११२-१॥🙏🌹 हमारी बुध्दियां और कर्म भिन्न-भिन्न प्रकार के हैं। बढई टूटी-फूटी गाड़ी को ठीक करना चाहता है। चिकित्सक रोग को…