वेद वाणी 29.03.24
🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 29.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 अजीजनो अमृत मर्त्येष्वाँ ऋतस्य धर्मन्नमृतस्य चारुणः। सदासरो वाजमच्छा सनिष्यदत्॥ ऋग्वेद ९-११०-४॥🙏🌻 हे अनादि जगदीश्वर ! आपने नश्वर मनुष्यों के लिए शांति और सुख की सभी व्यवस्थाएं की हैं। आपने नश्वर मनुष्य के लिए सूर्य आदि पदार्थ…
