वेद वाणी 28.03.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 28.03.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ पर्यू षु प्र धन्व वाजसातये परि वृत्राणि सक्षणिः। द्विषस्तरध्या ऋणया न ईयसे॥ ऋग्वेद ९-११०-१॥🙏🏵️ हे सोम ! हमें पोषण, ऊर्जा, और ज्ञान प्राप्त हो। हम नकारात्मकताओं के ऊपर विजय प्राप्त कर सकें। हम अपना ऋण चुकाए…