वेद वाणी 14.03.24

🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 14.03.24 वेद वाणी,🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 इन्द्रमच्छ सुता इमे वृषणं यन्तु हरयः। श्रुष्टी जातास इन्दवः स्वर्विदः॥ ऋग्वेद ९-१०६-१॥🙏🌻 उत्तम कर्म करने वाले योगी को परमात्मा का आनंद रस प्राप्त होता है। परमेश्वर के दिव्य गुण ऐसी जीवात्माओं के अंदर गहरे स्थापित होते…