वेद वाणी 07.02.24
🌼🌼 ।।ओ३म्।। 🌼🌼 🙏 07.02.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌼 अञ्जते व्यञ्जते समञ्जते क्रतुं रिहन्ति मधुनाभ्यञ्जते। सिन्धोरुच्छ्वासे पतयन्तमुक्षणं हिरण्यपावाः पशुमासु गृभ्णते॥ ऋग्वेद ९-८६-४३॥🙏🌼 परमेश्वर के उपासक परमेश्वर का साक्षात्कार अपने अंतःकरण में करते हैं। वे उस आनंद रस को प्राप्त करते हैं जिसके समान कोई…
