वेद वाणी 29.01.24
🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 29.01.24 वेद वाणी 🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 इन्द्राय सोम सुषुतः परि स्रवापामीवा भवतु रक्षसा सह। मा ते रसस्य मत्सत द्वयाविनो द्रविणस्वन्त इह सन्त्विन्दवः॥ ऋग्वेद ९-८५-१॥🙏🌺 विवेकी कर्मयोगी की नकारात्मकता और व्याधियों दूर होती हैं उसके जीवन में आनंद की धाराएं प्रवाहित होती…
