🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️
🙏 4.04.24 वेद वाणी🙏
अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️
यत्ते राजञ्छृतं हविस्तेन सोमाभि रक्ष नः।
अरातीवा मा नस्तारीन्मो च नः किं चनाममदिन्द्रायेन्दो परि स्रव॥ ऋग्वेद ९-११४-४॥🙏🏵️
हे सोम ! आपके जो उत्तम उपहार हैं वे हमें भी प्रदान करें। हमें आपका आशीर्वाद सदैव मिलता रहे। हमें आपका रक्षण प्राप्त हो। कोई शत्रु हमें हानि ना पहुंचा सके। हमारी सविनय प्रार्थना है कि हमें मोक्ष के पथ पर ले चलो। हमें दिव्य आनंद प्राप्त हो।🙏🏵️
O Som ! Please give us your best gifts. May we always receive your blessings. May we receive your protection. May no enemy be able to harm us. Our humble prayer is that you lead us to the path of salvation. May we receive divine bliss.
(Rig Ved 9-114-4)
🙏🏵️#vedgsawana🙏🏵️


