वेद वाणी 19.04.24
🌻🌻 ।।ओ३म्।। 🌻🌻 🙏 19.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌻 उषौषो हि वसो अग्रमेषि त्वं यमयोरभवो विभावा। ऋताय सप्त दधिषे पदानि जनयन्मित्रं तन्वे स्वायै॥ ऋग्वेद १०-८-४॥🙏🌻 हमें दिन-रात आगे बढ़ना है। हमें दीप्तिमान बनना है। हमें अपने शरीर से ही मित्र अर्थात प्रभु को धारण करना…
