वेद वाणी 18.04.24

🏵️🏵️ ।।ओ३म्।। 🏵️🏵️ 🙏 18.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🏵️ प्र केतुना बृहता यात्यग्निरा रोदसी वृषभो रोरवीति। दिवश्चिदन्ताँ उपमाँ उदानळपामुपस्थे महिषो ववर्ध॥ ऋग्वेद १०-८-१ अग्नि महान है। यह प्रकाश, उष्णता आदि गुणों के कारण सर्वत्र विद्यमान है। द्युलोक और पृथ्वीलोक में व्याप्त है। यह आकाश की…