वेद वाणी 15.04.24

🌺🌺 ।।ओ३म्।। 🌺🌺 🙏 15.04.24 वेद वाणी🙏 अनुवाद महात्मा ज्ञानेंद्र अवाना जी द्वारा, प्रचारित आर्य जितेंद्र भाटिया द्वारा 🙏🌺 अयं स यस्य शर्मन्नवोभिरग्नेरेधते जरिताभिष्टौ। ज्येष्ठेभिर्यो भानुभिर्ऋषूणां पर्येति परिवीतो विभावा॥ ऋग्वेद १०-६-१॥🙏🌺 यह वह अग्नि है जिसका दिव्य प्रकाश हर स्थान पर फैला हुआ है। जिसके आश्रय में हम पूर्णता की ओर बढ़ते हैं। जो हमें…